वचन ८: “स्मुरना की कलीसिया के दूत को यह लिख : “जो प्रथम और अन्तिम है, जो मर गया था और अब जीवित हो गया है, वह यह कहता है कि।”
स्मुरना की कलीसिया की स्थापना तब हुई जब पौलुस इफिसुस की कलीसिया की सेवा कर रहा था। उपरोक्त परिच्छेद के अनुसार, इस कलीसिया के सदस्य अपेक्षाकृत गरीब थे, जो अपने विश्वास के कारण, अपने समुदाय में यहूदियों द्वारा विरोध का सामना कर रहे थे। यहूदियों द्वारा इस कलीसिया को कितना सताया गया था, यह कलीसिया के फादर्स के युग में एक पर्यवेक्षक पॉलीकार्प की शहादत से देखा जा सकता है। प्रारंभिक कलीसिया के संतों को यहूदी विश्वासियों द्वारा निरंतर उत्पीड़न का सामना करना पड़ा जिन्होंने मसीह को अपने मसीहा के रूप में अस्वीकार कर दिया।
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वचन १: “यीशु मसीह का प्रकाशितवाक्य, जो उसे परमेश्वर ने इसलिये दिया कि अपने दासों को वे बातें, जिनका शीघ्र होना अवश्य है, दिखाए;...
वचन १: “जो सिंहासन पर बैठा था, मैं ने उसके दाहिने हाथ में एक पुस्तक देखी जो भीतर और बाहर लिखी हुई थी, और...