थुआतीरा की कलीसिया ने प्रेम, विश्वास और धैर्य के साथ परमेश्वर के कार्यों की सेवा की, और समय बीतने के साथ इसके कार्य बेहतर होते जा रहे थे। लेकिन साथ ही, यह एक ऐसी कलीसिया थी जो एक दुष्ट भविष्यवक्ता से त्रस्त थी। दुसरे शब्दों में, इसका गलत कार्य यह था कि इसके कुछ सदस्यों को इस पश्चाताप न करनेवाली झूठी भविष्यद्वक्ता द्वारा मूर्तिपूजा और यौन अनैतिकता करने के लिए धोखा दिया गया था। इस प्रकार प्रभु ने थुआतीरा की कलीसिया से पश्चाताप करने और अंत तक अपने पहले विश्वास को बनाए रखने की मांग की। प्रभु ने यह भी वादा किया कि जो लोग अंत तक अपने विश्वास की रक्षा करते हैं, उन्हें वह राष्ट्रों और भोर के तारे पर अधिकार देगा।
https://www.bjnewlife.org/
https://youtube.com/@TheNewLifeMission
https://www.facebook.com/shin.john.35
वचन १: “फिर मैं ने देखा कि मेम्ने ने उन सात मुहरों में से एक को खोला; और उन चारों प्राणियों में से एक...
प्रकाशितवाक्य 4 के वचन के द्वारा, हम यह पता लगा सकते हैं कि हमारा यीशु किस प्रकार का परमेश्वर है, और इस ज्ञान से...
वचन १: “जो सिंहासन पर बैठा था, मैं ने उसके दाहिने हाथ में एक पुस्तक देखी जो भीतर और बाहर लिखी हुई थी, और...