वचन १: “इन बातों के बाद जो मैं ने दृष्टि की तो क्या देखता हूँ कि स्वर्ग में एक द्वार खुला हुआ है, और जिसको मैं ने पहले तुरही के से शब्द से अपने साथ बातें करते सुना था, वही कहता है, “यहाँ ऊपर आ जा; और मैं वे बातें तुझे दिखाऊँगा, जिनका इन बातों के बाद पूरा होना अवश्य है।”
स्वर्ग का द्वार पहले बंद कर दिया गया था। लेकिन यह फाटक तब खुला था जब यीशु ने इस पृथ्वी पर आकर, यूहन्ना से बपतिस्मा लेकर, क्रूस पर मरकर, और मृत्यु से फिर जीवित होकर पापियों को उनके अधर्म से छूटकारा दिलाया। अपने स्वर्गदूतों के माध्यम से, परमेश्वर ने प्रेरित यूहन्ना को यह प्रकट किया कि अंत के समय में दुनिया के साथ क्या होगा।
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मैं उस प्रभु का धन्यवाद करता हूँ जो हमें इस अंधकारमय युग में आशा देता है। हमारी आशा यह है कि प्रकाशितवाक्य की पुस्तक...
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वचन ८: “स्मुरना की कलीसिया के दूत को यह लिख : “जो प्रथम और अन्तिम है, जो मर गया था और अब जीवित हो...