Ch3-6. चेलों के जीवन के लिए सच्चा विश्वास (प्रकाशितवाक्य ३:१४-२२)

Episode 17 December 08, 2022 00:11:26
Ch3-6. चेलों के जीवन के लिए सच्चा विश्वास (प्रकाशितवाक्य ३:१४-२२)
प्रकाशितवाक्य की किताब पर टिप्पणी और उपदेश - क्या मसीह विरोधी, शहादत, रेप्चर और हजार साल के राज्य का समय नज़दीक है? ( I )
Ch3-6. चेलों के जीवन के लिए सच्चा विश्वास (प्रकाशितवाक्य ३:१४-२२)

Dec 08 2022 | 00:11:26

/

Show Notes

लौदीकिया की कलीसिया का विश्वास एक ऐसा विश्वास था जो प्रभु के द्वारा बाहर किए जाने के योग्य था। इसलिए प्रभु ने यह सम्मति दी, कि वे आग में ताया हुआ सोना प्रभु से मोल ले, कि वे अपने विश्‍वास के धनी हो जाएं। यह गुनगुना विश्वास इस युग के धर्मियों के बीच भी प्रकट हो सकता है। क्योंकि उन्होंने अपना विश्वास मुफ्त में प्राप्त किया, वे यह नहीं जानते कि उनका विश्वास कितना कीमती है। इस प्रकार परमेश्वर ने धर्मियों को अपनी डांट और सम्मति का वचन सुनाया, कि उन्हें ऐसा विश्वास दिया जाए, जो आग में ताए गए सोने के समान है। हम इस सन्दर्भ से पता लगा सकते हैं कि प्रभु चाहता था कि एशिया की सभी सात कलीसियाओं में एक ही विश्वास हो। प्रभु ने उन सभी को आज्ञा दी जिनके कान हैं, वे सुनें कि पवित्र आत्मा उसकी कलीसियाओं से क्या कहता है।
३:१७ से, हम देखते हैं कि लौदीकिया की कलीसिया अपने स्वयं के धोखे में फंस गई थी, यह सोचकर कि इसकी भौतिक बहुतायत परमेश्वर के आत्मिक आशीर्वाद के समान थी और यह उनके विश्वास के कारण था। इस बहकावे में आने वाली मण्डली की ओर, परमेश्वर ने उनकी आत्मिक गरीबी और दुख की ओर तीखा संकेत किया।

 

https://www.bjnewlife.org/ 
https://youtube.com/@TheNewLifeMission 
https://www.facebook.com/shin.john.35 

Other Episodes

Episode 19

December 08, 2022 00:07:56
Episode Cover

Ch4-2. यीशु परमेश्वर है (प्रकाशितवाक्य ४:१-११)

प्रकाशितवाक्य 4 के वचन के द्वारा, हम यह पता लगा सकते हैं कि हमारा यीशु किस प्रकार का परमेश्वर है, और इस ज्ञान से...

Listen

Episode 5

December 08, 2022 00:06:37
Episode Cover

Ch2-3. स्मुरना की कलीसिया को पत्री (प्रकाशितवाक्य २:८-११)

वचन ८: “स्मुरना की कलीसिया के दूत को यह लिख : “जो प्रथम और अन्तिम है, जो मर गया था और अब जीवित हो...

Listen

Episode 2

December 08, 2022 00:18:00
Episode Cover

Ch1-2. हमें सात युगों को जानना ही चाहिए (प्रकाशितवाक्य १:१-२०)

मैं उस प्रभु का धन्यवाद करता हूँ जो हमें इस अंधकारमय युग में आशा देता है। हमारी आशा यह है कि प्रकाशितवाक्य की पुस्तक...

Listen