Ch2-4. मृत्यु तक विश्वासयोग्य रहे (प्रकाशितवाक्य २:८-११)

Episode 6 December 08, 2022 00:27:38
Ch2-4. मृत्यु तक विश्वासयोग्य रहे (प्रकाशितवाक्य २:८-११)
प्रकाशितवाक्य की किताब पर टिप्पणी और उपदेश - क्या मसीह विरोधी, शहादत, रेप्चर और हजार साल के राज्य का समय नज़दीक है? ( I )
Ch2-4. मृत्यु तक विश्वासयोग्य रहे (प्रकाशितवाक्य २:८-११)

Dec 08 2022 | 00:27:38

/

Show Notes

प्रारंभिक कलीसिया के युग के दौरान, कई मसीही सुरक्षित जगह की तलाश में भटक रहे थे, जहां वे रोमन अधिकारियों के हाथों सताव से बच सकें। रोमन साम्राज्य ने सम्राट नीरो के निधन के बाद भी उत्पीड़न की अपनी नीति जारी रखी, क्योंकि मसीही लोग बाद के सम्राटों के अधिकार की अवहेलना करते रहे। प्रारंभिक संतों ने रोमन सम्राटों के सांसारिक अधिकार को स्वीकार किया और समझा, लेकिन जब अपने विश्वास को छोड़ने की बात आई तब उन्होंने उसे मानने से इनकार कर दिया। क्योंकि वे रोमन अधिकारियों की ऐसी मांग के खिलाफ खड़े हुए थे, प्रारंभिक कलीसिया के इतिहास उत्पीड़न और शहादत से भरे हुए है।
हमें अपने आप से पूछना चाहिए कि क्या प्रकाशितवाक्य के वचन की आज के विश्वासियों के लिए कोई विशेष प्रासंगिकता है। आखिरकार, यह वर्त्तमान समय में नहीं लेकिन लगभग दो हजार साल पहले लिखा गया था, और एशिया के सात कलीसियाओं के लिए, हमारे लिए नहीं। यह हमारे लिए कैसे प्रासंगिक हो सकता है?

 

https://www.bjnewlife.org/ 
https://youtube.com/@TheNewLifeMission 
https://www.facebook.com/shin.john.35 

Other Episodes

Episode 16

December 08, 2022 00:09:08
Episode Cover

Ch3-5. लौदीकिया की कलीसिया को पत्री (प्रकाशितवाक्य ३:१४-२२)

वचन १४: “लौदीकिया की कलीसिया के दूत को यह लिख : “जो आमीन और विश्‍वासयोग्य और सच्‍चा गवाह है, और परमेश्‍वर की सृष्‍टि का...

Listen

Episode 1

December 08, 2022 00:18:57
Episode Cover

Ch1-1. परमेश्वर के प्रकाशितवाक्य के वचन को सुने (प्रकाशितवाक्य १:१-२०)

वचन १: “यीशु मसीह का प्रकाशितवाक्य, जो उसे परमेश्‍वर ने इसलिये दिया कि अपने दासों को वे बातें, जिनका शीघ्र होना अवश्य है, दिखाए;...

Listen

Episode 15

December 08, 2022 00:28:09
Episode Cover

Ch3-4. परमेश्वर के सेवक और संत जो परमेश्वर के ह्रदय को प्रसन्न करते है

परमेश्वर हमें यहाँ बताता है कि एशिया की सात कलीसियाओं में से, जिस कलीसिया को प्रभु ने सबसे अधिक सराहा और जो सबसे प्रिय...

Listen